खेत में उतरते ही लौट आईं पुरानी यादें, बोले—खेती मेरे लिए सिर्फ आजीविका नहीं, जीवन का संस्कार : CM साय

सावधान रहिए, सतर्क रहिए, चौकन्ने रहिए

रायपुर से महेंद्र नामदेव की रिपोर्ट 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अपनी माटी और खेती-किसानी से गहरा जुड़ाव एक बार फिर देखने को मिला। जशपुर जिले के अपने गृहग्राम बगिया में मुख्यमंत्री सुबह-सुबह खेत पहुंचे और बैलों की जोड़ी के साथ पारंपरिक तरीके से हल चलाकर बियासी की। खेत में हल की मूठ थामे मुख्यमंत्री पूरी तरह किसान की भूमिका में नजर आए और खेती-किसानी से जुड़ी अपनी पुरानी यादों को भी साझा किया।

 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अपने गांव, अपनी माटी और अपने खेत से जुड़ने का सुख ही अलग है। हल की मूठ थामते ही खेती-किसानी से जुड़ी पुरानी स्मृतियां जीवंत हो उठती हैं। उन्होंने कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और बचपन से खेती को करीब से देखा और अनुभव किया है। खेती उनके लिए केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन का संस्कार है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान यहां की माटी, मेहनतकश किसानों और समृद्ध कृषि परंपरा से जुड़ी है। प्रदेश के तीज-त्योहार और ग्रामीण जीवन भी खेती-किसानी से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में भी अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहना जरूरी है। किसान अपने परिश्रम से सिर्फ फसल ही नहीं उगाता, बल्कि पूरे समाज और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है।

 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के अन्नदाता किसानों के परिश्रम को नमन करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी, कृषि परंपरा और मेहनतकश किसान उनके हृदय के सबसे करीब हैं। किसानों की खुशहाली और कृषि की समृद्धि ही प्रदेश की समृद्धि का मजबूत आधार है। उन्होंने किसानों के जीवन में खुशहाली और खेतों में भरपूर फसल की कामना की।

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