सावधान रहिए, सतर्क रहिए, चौकन्ने रहिए
रायपुर से महेंद्र नामदेव की रिपोर्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पश्चिम एशिया में युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान यदि केंद्र सरकार समय रहते कदम नहीं उठाती, तो घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 2,000 रुपये तक पहुंच सकती थी। उन्होंने कहा कि सरकार की “इंडिया फर्स्ट” नीति और प्रभावी कूटनीति के चलते देश को इस संकट से सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया।
राजस्थान में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से अधिकांश आपूर्ति खाड़ी देशों से होती है। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण सप्लाई प्रभावित होने का खतरा था, लेकिन केंद्र सरकार ने तत्काल रिफाइनरियों को घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके चलते महज सात दिनों में उत्पादन 35 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर 54 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन हो गया।
प्रधानमंत्री ने बताया कि एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने तेजी से करीब 11 लाख घरों को पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि इसी तरह पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति भी निर्बाध बनाए रखी गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।
“अगर सरकार समय पर निर्णय नहीं लेती, तो घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 2,000 रुपये तक पहुंच सकती थी। लेकिन हमारी सरकार ने संवेदनशीलता और दूरदर्शिता के साथ काम करते हुए देश को इस संकट से सुरक्षित निकाला।” – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान राजस्थान रिफाइनरी का लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में इस परियोजना की शुरुआत हुई थी, लेकिन बीच के वर्षों में इसकी गति धीमी पड़ गई। अब दोबारा तेजी से काम पूरा कर इसे राष्ट्र को समर्पित किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में लगातार काम कर रही है।





