सीमावर्ती इलाकों की डेमोग्राफी पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की बड़ी बैठक, रिपोर्ट देगी समिति

महेंद्र नामदेव

रायपुर: अमित शाह ने डेमोग्राफिक बदलाव को लेकर एक बैठक की. घुसपैठ के कारण सीमावर्ती जिलों समेत देश के विभिन्न क्षेत्रों में जनसांख्यिकी बदलाव की समस्या से निपटने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के साथ शनिवार को केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री ने बैठक की. गृह मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि समिति के कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक और लॉजिस्टिक सहायता तुरंत उपलब्ध कराई जाए.

बैठक में मौजूद गृह मंत्रालय के अधिकारियों को उच्च स्तरीय समिति को समुचित सुविधा सुनिश्चित करने को कहा. इससे पहले, 5 जून को अमित शाह ने कहा था कि सरकार पश्चिम बंगाल , त्रिपुरा और बिहार में जन सांख्यिकीय बदलाव को बर्दाश्त नहीं करेगी गृह मंत्री अमित शाह ने देश के विभिन्न हिस्सों में हो रही घुसपैठ और उसके कारण आ रहे जनसांख्यिकी बदलावों को लेकर ये कदम उठाया है. पिछले महीने 26 मई को सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश जस्टिस प्रभाकर नाओलेकर की अध्यक्षता में औपचारिक रूप से समिति का गठन किया गया था। उन्होंने आयोग को सीमावर्ती जिलों में जनसंख्या में बदलाव का अध्ययन करने, आकलन के लिए सीमावर्ती इलाकों, मेट्रो शहरों और औद्योगिक कस्बों का दौरा करने का निर्देश दिए. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले साल 15 अगस्त को समिति बनाने की घोषणा थी. भारत भर में समिति का जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का आकलन करने का मकसद अवैध आप्रवासन और अन्य अप्राकृतिक कारणों से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान सुझाना है.

इस समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर हैं. इसके सदस्यों में जनगणना आयुक्त रिटायर्ड IAS अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, पूर्व IPS अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और डॉ. शमिका रवि शामिल हैं.
अमित शाह ने अधिकारियों को अवैध माइग्रेशन और अन्य अप्राकृतिक कारणों से होने वाले विस्थापन का आकलन करने का निर्देश दिया। जनसांख्यिकी परिवर्तन की समस्या अब सिर्फ सीमावर्ती जिलों तक सीमित नहीं रह गई है. इसके प्रभाव देश के बड़े महानगरों और प्रमुख औद्योगिक शहरों में भी साफ देखे जा रहे हैं.

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