सावधान रहिए, सतर्क रहिए, चौकन्ने रहिए
रायपुर से महेंद्र नामदेव की रिपोर्ट
बुंदेलखंड के इन मित्रों ने 50 वर्षों की मित्रता का ऐसा इतिहास रचा है, जिसे सुनकर आप भी कहेंगे—दोस्ती हो तो ऐसी!
आपने शायद ऐसी मित्रता की कहानी कभी न सुनी हो और न ही कभी सुनेंगे। आइए, आपको मिलवाते हैं इन दोस्तों से और दिखाते हैं 50 साल पुरानी दोस्ती की यह बेमिसाल कहानी। यह कहानी मध्य प्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिले से जुड़ी है। आज का दिन इन दोस्तों के लिए बेहद खास और यादगार रहा। दरअसल, पन्ना निवासी बसंत खरया जी के निवास पर सावन के पावन पर्व के अवसर पर शिवचरण और शिवलिंग बनाए जा रहे थे। इसी धार्मिक आयोजन के दौरान बसंत खरया जी ने अपने पुराने मित्रों को पन्ना आने का निमंत्रण दिया।

बसंत जी का निमंत्रण मिलते ही वर्षों से अलग-अलग शहरों में रह रहे उनके सभी मित्र एक बार फिर एक साथ मिलने के लिए पन्ना पहुंच गए। इन मित्रों की दोस्ती आज की नहीं, बल्कि करीब 45 से 50 वर्षों पुरानी है। सभी मित्रों ने पांचवीं कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक एक साथ शिक्षा प्राप्त की। पढ़ाई पूरी होने के बाद कोई नौकरी में चला गया तो किसी ने अपना व्यवसाय शुरू किया। अपने-अपने काम और जिम्मेदारियों के चलते सभी मित्र अलग-अलग शहरों में बस गए। समय बीतता गया और मुलाकातें कम होती चली गईं। कई बार इच्छा होने के बावजूद सभी दोस्तों का एक साथ मिलना संभव नहीं हो पाया। लेकिन कहते हैं कि जब ऊपर वाले की कृपा होती है तो बिछड़े हुए लोग भी एक-दूसरे से मिल जाते हैं।
कुछ ऐसा ही संयोग इस बार बना। भोलेनाथ की कृपा से करीब 50 साल बाद सभी पुराने मित्र एक साथ एक जगह जुटे। वर्षों बाद एक-दूसरे को सामने देखकर दोस्तों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सभी एक-दूसरे के गले मिले और पुरानी यादों में खो गए। मुलाकात का यह पल कुछ ऐसा था, मानो बचपन फिर लौट आया हो। चेहरे पर वही मुस्कान, वही अपनापन और वही पुरानी दोस्ती दिखाई दी। सभी मित्रों ने साथ बैठकर पुरानी यादें ताजा कीं, जमकर हंसी-मजाक किया और एक साथ फोटो सेशन भी कराया।
आज के दौर में जहां समय के साथ कई रिश्तों में दूरियां बढ़ रही हैं, वहीं इन दोस्तों ने अपनी पांच दशक पुरानी दोस्ती को आज भी जिंदा रखकर एक खूबसूरत संदेश दिया है। दोस्ती के सामने न कोई अमीरी मायने रखती है और न गरीबी। असली मायने रखता है तो सिर्फ विश्वास, अपनापन और एक-दूसरे के प्रति सम्मान।

इन दोस्तों की मुलाकात ने यह साबित कर दिया कि सच्ची मित्रता समय और दूरी की मोहताज नहीं होती। चाहे कितने ही साल क्यों न बीत जाएं, सच्चे दोस्त जब मिलते हैं तो पुरानी यादें फिर से जीवंत हो जाती हैं।
इन बुंदेलखंडी मित्रों ने अपनी दोस्ती के जरिए समाज को एक खूबसूरत संदेश दिया है—परिवार हो या मित्र, रिश्तों में प्रेम, विश्वास और अपनापन बनाए रखना चाहिए।
50 साल बाद हुई यह मुलाकात निश्चित रूप से इन सभी दोस्तों के जीवन की यादगार मुलाकातों में शामिल हो गई है और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी दोस्ती की एक मिसाल बन गई है।
मेरी ओर से इन सभी मित्रों को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं। ईश्वर करे इनकी मित्रता हमेशा यूं ही बनी रहे।
जय बुंदेलखंड!
जय किशोर जी महाराज!
जय प्राणनाथ महाराज! 🚩






