संत शिरोमणि नामदेव महाराज के विचारों पर चलना है, तो समाजहित को सर्वोपरि रखना होगा

सावधान रहिए, सतर्क रहिए, चौकन्ने रहिए

रायपुर से महेंद्र नामदेव की रिपोर्ट 

हम सभी गर्व से कहते हैं कि हम संत शिरोमणि नामदेव महाराज के विचारों से प्रेरित समाज हैं। यदि वास्तव में ऐसा है, तो हमें आत्ममंथन भी करना चाहिए कि क्या हमारे आचरण, हमारी सोच और हमारी कार्यशैली में उनके आदर्शों की झलक दिखाई देती है?

आज यदि पूरे भारत में अपने समाज की स्थिति का गंभीरता से मूल्यांकन करें, तो यह स्पष्ट दिखाई देता है कि राजनीतिक दृष्टि से हमारा प्रतिनिधित्व अत्यंत सीमित है। हमारे समाज से न पर्याप्त विधायक हैं, न सांसद और न ही प्रभावी मंत्री। यह स्थिति केवल संयोग नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक सोच और व्यवहार का परिणाम भी है।

दुर्भाग्य यह है कि जब समाज का कोई व्यक्ति संघर्ष करके आगे बढ़ने का प्रयास करता है, तब उसे प्रोत्साहित करने के बजाय उसके मार्ग में बाधाएँ खड़ी की जाती हैं। उसका मनोबल बढ़ाने के स्थान पर उसे हतोत्साहित करने और उसकी छवि को कमजोर करने का प्रयास अधिक दिखाई देता है। यह प्रवृत्ति समाज के भविष्य के लिए अत्यंत घातक है।

आज अनेक संस्थाएँ बड़े-बड़े नामों से संचालित हो रही हैं, परंतु यदि उनके सामाजिक और राजनीतिक योगदान का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाए, तो वह अपेक्षाओं के अनुरूप दिखाई नहीं देता। समाजहित के ठोस कार्यों की अपेक्षा केवल फोटो, सम्मान समारोह और प्रचार-प्रसार तक ही गतिविधियाँ सीमित रह जाएँ, तो समाज की वास्तविक उन्नति संभव नहीं हो सकती।

यह भी अत्यंत चिंताजनक है कि कुछ लोग समाज के आराध्य संत शिरोमणि नामदेव महाराज के विचारों और प्रेरणा को केंद्र में रखने के बजाय स्वयं को केंद्र में स्थापित करने का प्रयास करते हैं। समाचारों और आयोजनों में समाज के आदर्शों से अधिक व्यक्तिगत प्रचार को महत्व देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता।

कुछ लोग वर्षों तक पदों पर बने रहना ही अपना अधिकार समझ लेते हैं। मानो पद समाजसेवा का माध्यम न होकर व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का साधन बन गया हो। वास्तव में पद किसी व्यक्ति को बड़ा नहीं बनाता, बल्कि उसका निस्वार्थ कार्य, उसका चरित्र और समाज के प्रति उसका समर्पण ही उसे सम्मान दिलाता है।

सबसे अधिक पीड़ादायक स्थिति तब होती है, जब समाज के लिए निरंतर कार्य करने वाले लोगों को सहयोग मिलने के बजाय विरोध का सामना करना पड़ता है। उनकी प्रत्येक पहल में कमियाँ ढूँढ़ना, उनके प्रयासों को कमजोर करना और उन्हें निराश करना यदि हमारी प्रवृत्ति बन जाए, तो समाज कभी आगे नहीं बढ़ सकता।

यदि हम सचमुच चाहते हैं कि हमारा समाज प्रगति करे, राजनीतिक रूप से सशक्त बने और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रभावशाली पहचान स्थापित करे, तो हमें समाज के प्रत्येक कर्मशील व्यक्ति का उत्साहवर्धन करना होगा। जो समाज के लिए कार्य कर रहे हैं, उनके पीछे मजबूती से खड़ा होना होगा। सोशल मीडिया हो या सामाजिक मंच—हर स्थान पर सकारात्मक वातावरण का निर्माण करना होगा।

याद रखिए, आलोचना तब सार्थक होती है जब उसका उद्देश्य सुधार हो; लेकिन यदि उद्देश्य केवल किसी को नीचे गिराना हो, तो वह समाज को कमजोर ही करती है।

हमें व्यक्तियों के प्रति नहीं, उनके कार्यों के प्रति सम्मान रखना चाहिए। प्रेम, विश्वास, सहयोग और संगठन—यही किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति होती है।

हम सभी को यह संकल्प लेना होगा कि हमारे लिए किसी व्यक्ति से बड़ा समाज होगा और समाज से भी ऊपर हमारे आराध्य संत शिरोमणि नामदेव महाराज के आदर्श होंगे।

जब तक यह भावना प्रत्येक समाजबंधु के हृदय में नहीं जागेगी कि “संत शिरोमणि नामदेव महाराज से बड़ा कोई नहीं और समाज से ऊपर कोई नहीं,” तब तक केवल स्वयं को उनका अनुयायी कह देने से बात सिद्ध नहीं होगी।

आइए, हम सब मिलकर नकारात्मकता का नहीं, सकारात्मक परिवर्तन का संकल्प लें। विरोध का नहीं, सहयोग का वातावरण बनाएँ। व्यक्तिपूजा का नहीं, समाजसेवा का मार्ग अपनाएँ। यही संत शिरोमणि नामदेव महाराज के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि और वास्तविक अनुकरण होगा।

“समाज की शक्ति हमारी एकता में है, समाज का भविष्य हमारे सहयोग में है और समाज का गौरव हमारे कर्म में है।”गिरीश वर्मा राष्ट्रीय अध्यक्ष विट्ठल सम्प्रदाय महा सभा भारत एवं आजीवन सदस्य नामदेव समाज विकास परिषद मध्य प्रदेश

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