सावधान रहिए, सतर्क रहिए, चौकन्ने रहिए
रायपुर से महेंद्र नामदेव कि रिपोर्ट
धमतरी : जिले में मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर आदिवासी ग्रामीणों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। करीब 52 गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में धमतरी पहुंचे और कलेक्ट्रेट घेराव का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बन गई।वीओ:धमतरी जिले के आदिवासी अंचलों से आए करीब 52 गांवों के ग्रामीण सोमवार को सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर धमतरी पहुंचे।

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से वे अपनी समस्याओं को लेकर शासन-प्रशासन के सामने गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है। उनका कहना है कि आज भी कई गांवों में सड़क, शुद्ध पेयजल, बिजली और स्वास्थ्य जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

ग्रामीण वाहनों से धमतरी पहुंचे और शोभाराम देवांगन चौक में एकत्रित होने के बाद पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हुए। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की।स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पहले से अलर्ट रहा। बनरौद के पास बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया गया। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच आगे बढ़ने को लेकर तीखी बहस हुई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की भी जानकारी सामने आई है।ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि गांवों में विकास कार्य धरातल पर दिखाई देने चाहिए।
उन्होंने कलेक्टर से सीधे मुलाकात कर समस्याओं के समाधान की मांग की है। वहीं प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों से चर्चा कर स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।




