सावधान रहिए, सतर्क रहिए, चौकन्ने रहिए।
रायपुर से महेंद्र नामदेव के साथ वैष्णवी नामदेव की रिपोर्ट
रायपुर/05 अक्टूबर 2026। भाजपा सरकार पर प्रदेश की बहुसंख्यक आबादी, अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ अन्याय और विश्वासघात करने का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा के लिए ओबीसी सिर्फ वोट बैंक है, जब गिनती की बात आती है तो फॉर्म से गायब, जब हक की बात आती है तो राजभवन में फाइल दबा दी जाती है। जो भाजपा चुनाव में ओबीसी का नाम जपकर वोट मांगती है, सत्ता में आते ही उसी समाज के पीठ पर छुरा घोंपने का काम करती है। एक तरफ राष्ट्रीय जनगणना के फॉर्म से ओबीसी की गिनती का स्पष्ट कॉलम गायब कर दिया गया है, तो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ की विधानसभा द्वारा पारित 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण बिल को 2 दिसंबर 2022 से आज तक दबाकर रखा गया है। भाजपा का सीधा मंत्र हैकृवोट लेंगे ओबीसी का, अधिकार देंगे दूसरों को?
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैजj ने कहा है कि भाजपा ओबीसी कल्याण और सबका विकास का दावा करती है, लेकिन छत्तीसगढ़ में ओबीसी की आबादी लगभग आधे से अधिक है, फिर भी राज्य में 27 प्रतिशत आरक्षण के विधेयक को कानून बनाने में टालमटोल की जा रही है। पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के दौरान सर्वसम्मति से विधानसभा द्वारा पारित 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण विधेयक पर राज्यपाल के माध्यम से रोड़ा अटकाना और केंद्र स्तर पर जनगणना में ओबीसी के लिए स्पष्ट कॉलम शामिल न करना, जातियों की ड्रॉप डाउन सूची न होना यह दर्शाता है कि भाजपा की नीति केवल वोटों तक सीमित है, संवैधानिक अधिकारों तक नहीं। जनगणना फार्म में सटीक और पारदर्शी गिनती के लिए सवाल नंबर 10 के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की तरह ही एक अलग और स्पष्ट ओबीसी कॉलम अनिवार्य करे सरकार, जिससे ओबीसी वर्ग की पृथक गिनती

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि जब तक जातिगत गिनती नहीं होगी, तब तक योजनाओं का बजट और आरक्षण का सही दायरा तय नहीं हो सकता। जनगणना के आधिकारिक फार्म में एससी, एसटी के अलावा अन्य जातियों के लिए एक ओपन एंडेड कॉलम दिया गया है, जिसमें अलग से ओबीसी वर्ग का पृथक विकल्प नहीं है, भाजपा ओबीसी वर्ग की गिनती से डरती क्यों है? सरकार का ओबीसी विरोधी षड्यंत्र छत्तीसगढ़ के पिछड़े वर्ग के युवाओं के भविष्य और स्वाभिमान पर सीधा हमला है, बहुसंख्यक आबादी के शिक्षा और रोजगार के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, उन्हें उनके हक़ का आरक्षण लाभ नहीं मिल पा रहा है। राज्य के ओबीसी समाज के अधिकारों को जानबूझकर राजभवन और दिल्ली के चक्कर में फंसाकर रखा गया है। भाजपा का असली चेहरा बेनकाब हो गया है, न ये जनगणना में ओबीसी वर्ग की पृथक गिनती देंगे, न छत्तीसगढ़ में पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण। प्रदेश के डेढ़ करोड़ से ज्यादा ओबीसी समाज की जनता से भाजपा की सरकार खुली वादाखिलाफी कर रही है।




