नुआखाई सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक गौरव का महापर्व : भगवानू।

सावधान रहिए, सतर्क रहिए, चौकन्ने रहिए।

रायपुर से महेंद्र नामदेव के साथ वैष्णवी नामदेव की रिपोर्ट

रायपुर, 5 गांड़ा समाज प्रमुख पारंपरिक पर्व आगामी दिनांक 15 सितंबर को है इस अवसर पर राजधानी रायपुर में इसके पूर्व आज 6 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाली भव्य शोभायात्रा को लेकर समाज में उत्साह का वातावरण है। इस ऐतिहासिक शोभायात्रा में रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में समाज के लोग शामिल होंगे। सामाजिक नेता अधिवक्ता भगवानू नायक ने समाज के सभी लोगों से अपील करते हुए कहा कि नुआखाई केवल नई फसल के स्वागत और पूजा-अर्चना का पर्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता, भाईचारे, आपसी प्रेम, सद्भाव और सांस्कृतिक गौरव का महापर्व है।

उन्होंने कहा कि नुआखाई हमारी कृषि संस्कृति और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता की भावना से जुड़ा हुआ पर्व है। नई फसल के घर आने पर समाज के लोग अपनी कुल देवी-देवताओं, पूर्वजों और प्रकृति की पूजा-अर्चना करते हैं तथा ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि धरती माता की कृपा से प्रत्येक वर्ष अच्छी फसल हो और समाज में सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहे।भगवानू नायक ने कहा कि नुआखाई हमारी समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और सामाजिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर भी है। विशेषकर युवा पीढ़ी जिस उत्साह के साथ शोभायात्रा की तैयारी में जुटी है, वह समाज की सांस्कृतिक चेतना और एकजुटता का प्रतीक है।उन्होंने बताया कि शोभायात्रा में पारंपरिक वाद्य यंत्र, गांड़ा बाजा, सिंघ बाजा, संबलपुरी नृत्य एवं घुमरा नृत्य सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेंगी। यह शोभायात्रा समाज की कला, संस्कृति और परंपराओं का भव्य प्रदर्शन करेगी।भगवानू नायक ने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम अपनी संस्कृति और परंपराओं को केवल उत्सव तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें सामाजिक एकता और नई पीढ़ी के संस्कारों से जोड़ें। नुआखाई हमें यह संदेश देता है कि अन्नदाता किसान, प्रकृति, पूर्वज और समाज—सभी के प्रति सम्मान और कृतज्ञता हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने गांड़ा समाज के सभी सामाजिक बंधुओं, माताओं-बहनों, युवाओं एवं बच्चों से अपील की कि 6 सितंबर की भव्य नुआखाई शोभायात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इसे ऐतिहासिक और यादगार बनाएं। उन्होंने कहा कि समाज की एकजुटता और सहभागिता ही इस महापर्व की वास्तविक शक्ति है।

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