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शिवरीनारायण से महेंद्र नामदेव की रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में स्थित शिवरीनारायण केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और पौराणिक मान्यताओं का अद्भुत संगम है। महानदी, शिवनाथ और जोंक नदियों के पवित्र त्रिवेणी संगम पर बसा यह नगर भगवान श्रीराम और माता शबरी के मिलन की पावन स्मृतियों को संजोए हुए है। यही कारण है कि शिवरीनारायण को ‘शबरी की नगरी’ और ‘छत्तीसगढ़ की जगन्नाथपुरी’ के नाम से भी जाना जाता है। हर वर्ष यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन और पुण्य लाभ के लिए पहुंचते हैं।

रामायण की पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम अपने 14 वर्ष के वनवास के दौरान माता सीता की खोज करते हुए इस क्षेत्र में पहुंचे थे। यहीं माता शबरी ने अपने प्रभु की प्रतीक्षा वर्षों तक की और प्रेमपूर्वक अपने हाथों से बेर खिलाए। कहा जाता है कि माता शबरी पहले स्वयं बेर चखती थीं, ताकि भगवान श्रीराम को केवल मीठे फल ही मिलें। भगवान श्रीराम ने उनके निष्कलंक प्रेम और भक्ति को स्वीकार करते हुए उन झूठे बेरों को प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया। यही घटना भारतीय संस्कृति में सच्ची भक्ति और समर्पण का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती है। इसी वजह से शिवरीनारायण को माता शबरी की तपोभूमि के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है।
शिवरीनारायण का एक और बड़ा आकर्षण यहां स्थित ऐतिहासिक भगवान जगन्नाथ मंदिर है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ का मूल निवास शिवरीनारायण ही माना जाता है और बाद में उनकी स्थापना ओडिशा के पुरी में हुई। इसी कारण इस नगर को ‘छत्तीसगढ़ की जगन्नाथपुरी’ भी कहा जाता है। इसके अलावा 11वीं शताब्दी में हैहयवंशी राजाओं द्वारा निर्मित नर-नारायण (लक्ष्मीनारायण) मंदिर अपनी प्राचीन स्थापत्य कला, सुंदर शिल्पकारी और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यहां की नक्काशी और वास्तुकला आज भी इतिहासकारों और पर्यटकों को आकर्षित करती है।
महानदी, शिवनाथ और जोंक नदियों का पवित्र त्रिवेणी संगम शिवरीनारायण की आध्यात्मिक पहचान को और भी विशेष बनाता है। माघ पूर्णिमा के अवसर पर यहां विशाल धार्मिक मेले का आयोजन होता है, जिसमें छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। धार्मिक आस्था, पौराणिक इतिहास, प्राचीन मंदिरों की भव्यता और प्राकृतिक सुंदरता का अनूठा संगम शिवरीनारायण को छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में शामिल करता है। यही कारण है कि यह नगर आज भी श्रद्धालुओं, इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।







