रायपुर से महेंद्र नामदेव की रिपोर्ट
राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भानगढ़ किला भारत के सबसे रहस्यमयी स्थलों में गिना जाता है। अरावली पर्वतमाला की तलहटी में बसे इस किले का निर्माण 16वीं शताब्दी में आमेर के राजा भगवंत दास ने अपने पुत्र माधो सिंह के लिए कराया था। एक समय यह किला समृद्ध व्यापार, खूबसूरत महलों और भव्य मंदिरों के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन आज यह खंडहरों में तब्दील हो चुका है।

भानगढ़ किले से जुड़ी सबसे चर्चित कहानी राजकुमारी रत्नावती और एक तांत्रिक सिंधु सेवड़ा की है। कहा जाता है कि राजकुमारी अपनी सुंदरता के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध थीं। तांत्रिक उनसे प्रेम करने लगा और उन्हें पाने के लिए उसने जादू-टोने का सहारा लिया।

किंवदंती के अनुसार, राजकुमारी को इस षड्यंत्र का पता चल गया और तांत्रिक की योजना विफल हो गई। मरते समय तांत्रिक ने पूरे भानगढ़ नगर को श्राप दे दिया कि यहां कभी कोई बस नहीं पाएगा। इसके बाद युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं के कारण यह नगर उजड़ गया।

हालांकि इतिहासकार इन कहानियों को लोककथाओं का हिस्सा मानते हैं, लेकिन भानगढ़ की रहस्यमयी पहचान आज भी लोगों को आकर्षित करती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा यहां सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है, जिससे इस किले के रहस्य और भी गहरे हो जाते हैं।

आज भानगढ़ किला इतिहास प्रेमियों, पर्यटकों और रोमांच के शौकीनों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है। यहां की वीरान गलियां, टूटे महल और प्राचीन मंदिर अतीत की गौरवगाथा के साथ-साथ रहस्य की अनकही दास्तान भी सुनाते हैं।



