पन्ना के जुगल किशोर मंदिर की कहानी। एक दिव्य प्रेम कथा जो आज भी है जीवित…

सावधान रहिए, सतर्क रहिए, चौकन्ने रहिए

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से महेंद्र नामदेव की रिपोर्ट

मध्य प्रदेश का पन्ना जिला एक छोटा सा शहर है लेकिन वह शहर छोटा जरूर है परंतु हीरौ की नगरी के नाम से प्रसिद्ध है अभी हाल में ही हमने आपको पन्ना के प्रसिद्ध मंदिरों को दिखाया था हीरा की खदान भी दिखाई थी उसके अलावा हमारे इस पन्ना में पत्थरों की बड़ी-बड़ी खदान है जहां बड़े बड़े पत्थरों से मकान को बनाया जाता है। पत्थर की खदान में 15 से 20 25 फीट लंबे पत्थर निकलते हैं जिनका उपयोग मकान की छत बनाने की काम आते है उसके अलावा पन्ना को तालाबों की नगरी भी कहा जाता है क्योंकि पन्ना में टोटल 16 तालाब है और उन तालाबों का भी रहस्य है उनका रहस्य भी हम आपको आगे बताएंगे लेकिन आज हम एक ऐसा मंदिर दिखा रहे है जो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है और वह मंदिर है जुगल किशोर जी का उसका भी हम रहस्य बताएंगे जुगल किशोर जो मूर्ति है कृष्ण भगवान की उनकी मुरलिया में हीरा जड़े हुए है ।

पन्ना (मध्य प्रदेश) का जुगल किशोर मंदिर भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी तीर्थस्थल है। इस मंदिर की मूर्ति को औरंगजेब के शासनकाल के दौरान वृंदावन से सुरक्षित निकालकर बुंदेलखंड लाया गया था, जिसे बाद में राजा हिंदूपत सिंह ने पन्ना में स्थापित करवाया। इस अद्भुत मंदिर से जुड़ी मुख्य ऐतिहासिक और धार्मिक बातें इस प्रकार हैं।

वृंदावन से पन्ना का सफर देखिए।

मुगल काल में जब मंदिरों और मूर्तियों को तोड़ा जा रहा था, तब जुगल किशोर जी की मूर्ति को वृंदावन से ओरछा के रास्ते पन्ना लाया गया, जो बुंदेला राजाओं के संरक्षण में पूरी तरह सुरक्षित था। राजा हिंदूपत सिंह द्वारा निर्माण: इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण बुंदेला वंश के चौथे शासक, राजा हिंदूपत सिंह द्वारा 1758 से 1778 ईस्वी के बीच करवाया गया था। हीरे जड़ी मुरली: इस मंदिर के भगवान जुगल किशोर जी की मुरली (बांसुरी) में बेशकीमती पन्ना जड़ा हुआ है। इस संदर्भ में बुंदेलखंड में एक बहुत प्रसिद्ध लोकगीत भी गाया जाता है: “पन्ना के जुगल किशोर की मुरलिया में हीरा जड़े हैं…” पितृपक्ष की अनूठी मान्यता: बुंदेलखंड में इस मंदिर को बहुत चमत्कारी माना जाता है। मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान भगवान जुगल किशोर अपने पितरों को तर्पण करते हैं, इसलिए इन 15 दिनों तक भगवान को सफेद वस्त्र पहनाए जाते हैं और यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।

सभी तीर्थ निष्फल

यहाँ के स्थानीय लोगों और भक्तों में यह गहरी आस्था है कि चारों धाम या किसी भी अन्य तीर्थ यात्रा करने के बाद भी, यदि पन्ना आकर जुगल किशोर जी के दर्शन नहीं किए तो यात्रा अधूरी मानी जाती है। इस मंदिर के कपाट हर अमावस्या पर विशेष रूप से श्रद्धालुओं के लिए खुलते हैं और दूर-दूर से लोग यहाँ दर्शन और मन्नत मांगने आते हैं। आप जुगल किशोर जी मंदिर जानकारी के माध्यम से इस ऐतिहासिक स्थल के बारे में आधिकारिक विवरण देख सकते।

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